जूही के उपवन में,
हम गन्दी गन्ध नहीं होने देंगे।
कुछ भी हो जाए पर,
हम भारत बन्द नहीं होने देंगे।
पैसे खत्म हुये हैं लेकिन,
मन में गै़रत अब भी जिन्दा है।
नौजवानों की आँखों में,
सपनों का भारत ही जिन्दा है।
अंध युग को काट रही हैं,
सूरज की उजली पाँखे।
तुम कहते हो बन्द कर लें,
हम ऐसे में अपनी आँखें।
परिवर्तन का पुण्य यज्ञ,
हम विफल नहीं होने देंगे।
बंदी का षड्यंत्र तुम्हारा
यूँ सफल नहीं होने देंगे।
सत्तर सालों से कालाधन,
हमको काटे जाता था।
मुफ़्फलिस और शाह में,
हमको बांटे जाता था।
ये भीषण आघात है,
चोरों की मक्कारी पर।
तीखी चोट पड़ी है अब,
नस-नस की बीमारी पर।
मनोरुग्ण बिलबिला रहे हैं,
मोदीजी के निर्णय से।
कालसर्प कुलबुला रहे हैं,
नागयज्ञ के निश्चय से।
भारतबंदी की बातें,
संपोलों की फुँफकारें हैं।
आज कुंडली टूट रही है,
ये सब उसकी टंकारें हैं।
ममता निर्ममता से सच की,
आँख फोड़ने निकली है।
देशबंद का लिये हथौड़ा,
मुल्क तोड़ने निकली है।
दिल्ली का सीएम हरकतें,
पागलपन की करता है।
खुद का भ्रष्टाचार उजागर,
हो जाने से डरता है।
कुछ नालायक भी,
बेमतलब विरोध में उतरे हैं।
कुछ अच्छा होने को है,
फिर क्यों निरोध पर उतरे हैं।
शब्दभेद शर चढ़ा हुआ है,
देशभक्ति की ही डोरी पर।
ओ' चौहानों चूक न जाना,
ये हमला है उस गौरी पर।
राष्ट्र अस्मिता पर जब भी,
कोई संकट छा जाता है।
भारत का हर लाल सड़क पर,
सैनिक बन आ जाता है।
वर्दी वाले ठोक रहे,
पाकी किस्मत के मारों को।
हमको भी निपटाना है,
घर के ही इन ग़द्दारों को।
हाँ थोड़ी दिक्कत तो है सबको,
ये हम भी स्वीकार कर रहे।
मोदीजी भी नित नवपरिवर्तन,
यूँ ही अंगीकार नहीं कर रहे।
मुश्किल कम से कम हो सबको,
इस पर नित दिन मेहनत जारी है।
दवा कसैली लेनी होगी हमको,
जड़ सहित उखाड़ना बीमारी है।
वणिक बन्धुओं करबद्ध,
तुमसे आज निवेदन है।
बन्द न करना भारत माँ का
तुमसे अपना आवेदन है।
देश धर्म हित सब न्यौछावर,
तुम उस जज्बे के अंशज हो।
भूल न जाना आप कभी,
किस भामाशाह के वंशज हो।
देशविरोधी तत्वों से हरगिज़,
हरगिज़ अनुबंध नहीं होगा।
28 को किसी कीमत पर भी,
अपना भारत बन्द नहीं होगा।
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